सिंगरौली में लॉक डाउन पर प्रकृति प्रसन्न है ।

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सिंगरौली और कोरोना

कोरोनावायरस की महामारी ने पूरे विश्व को जकड़ लिया है। यह महामारी चीन से शुरू होकर धीरे धीरे अब 190 देशों में अपने पैर पसार चुकी है जिससे भारत भी अछुता नहीं है । इस महामारी के  कारण अर्थव्यवस्था चरमरा गई है, बाजार सूचकांक नीचे आ गए हैं और सामाजिक जीवन में लोग एक नया प्रयोग कर रहे हैं जिसका नाम है “सामाजिक दूरी” यानी Social Distancing । सबसे चिंता की बात तो यह है कि अभी तक किसी वैज्ञानिक ने कोरोना वायरस का कोई उपचार उपलब्ध होने की पुष्ठी नहीं की है। सिंगरौली और कोरोना का मिलन न होना अभी तक बहुत भाग्य की बात है ।  निश्चित तौर पर इस के लिए सिंगरौली जिला प्रशासन मुख्यतः मुखिया, माननीय कलेक्टर द्वार किये गए प्रयासों  और जनता की सजगता की सराहना करनी चाहिए

कोरोना व लाक डाउन का सिंगरौली पर सकारात्मक प्रभाव

पर इन सब बातों के बीच कुछ अच्छा भी हो रहा है। इस महामारी के कारण प्रकृति को थोड़ा आराम मिला है और उसके दोहन में भारी कमी आई है। यह नहीं कहा जा सकता ऐसा आराम प्रकृति को हमेशा ही मिलता रहेगा परंतु फिलहाल तो ऐसा ही हो रहा है।

साकारात्मक हो कर सोचा जाए तो कोरोना व लाक डाउन का सिंगरौली पर सकारात्मक प्रभाव भी पड़ा है। सिंगरौली का वातावरण पहले से ज्यादा शुद्ध प्रतीत हो रहा है। हाल ही में हुए लॉक डाउन के कारण सब अपने आप को अपने अपने घरों में समेट के रख रहे हैं |  माननीय कलेक्टर द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों के कारण यातायात में भी भारी कमी आई है। सिंगरौली के आकाश को आसानी से देखा जा सकता है| पहले शहरी इलाके में तारे इतने साफ कभी नहीं दिखे जितने अब दिख रहे हैं।

यातायात के कारण होने वाले शोर-शराबे में भी भारी कमी आई है। इस कारण सड़कों पर घूमने वाले जानवर भी अचरज में हैं। जहाँ पहले सिंगरौली का Air Quality Index 400 के पार होता था वहीँ आजकल ये 150 पर है। ग्रीन हाउस गैसों में भारी कमी हुई है। कार्बन गैस उत्सर्जन में भी कमी देखने को मिल रही है । Carbon Brief नामक संस्था द्वारा किए एक शोध से पता चला है कि इस दौरान कार्बन गैस उत्सर्जन में 15% से 40% की कमी आई है। यात्रा करना वह भी हवाई जहाज द्वारा यात्रा करना कुछ ना कुछ प्रकृति से लेता भी है। CO2 गैस के उत्सर्जन में एक बहुत बड़ा कारण बड़े मात्रा में होने वाली हवाई यात्रा भी है । वैश्विक तौर पर हवाई यात्रा के कारण 2.5 प्रतिशत कार्बन गैस उत्सर्जन होता है। उड़ाने बंद होने से इसमें भी कमी हुई है। हालाँकि हवाई यात्रा का कोई प्रभाव सिंगरौली के ऊपर अभी नहीं है,परन्तु जल्द  ही खुलने वाले  हवाई अड्डे के बाद ये सिंगरौली को भी प्रभावित करेगा ।

सिंगरौली की सड़क दुर्घटनाओ में कमी

पता नहीं कितना सही है पर यह भी देखने में आ रहा है सिंगरौली क्षेत्र में होने वाली सिंगरौली की सड़क दुर्घटनाओ में कमी आई है। पहले ऐसा कोई दिन नहीं होता था जब अखबारों में हर रोज़ सड़क दुर्घटनाओ से होने वाली मृत्यु की खबर नज़र न आती हो। अगर सामान्य दिनों में भी सिंगरौली के लोग यातायात नियमों का पालन करें तो न जाने कितने घर मातम मनाने से बच जायें। वैसे भी औसतन हर 2.5 दिनों में सड़क दुर्घटना से सिंगरौली में एक व्यक्ति की जान चली जाती है ।

 

सामाजिक दूरी व पारिवारिक निकटता

कर्मचारी होने के कारण मै सुबह 9:00 बजे से लेकर शाम 7:00 बजे तक अपने कामकाज में हमेशा ही व्यस्त रहता था, परंतु इस LockDown के कारण अब मैं घर पर रहने को विवश हूँ । पहले पहल यह बहुत असहज लगा परंतु अब परिवार में बच्चों के साथ समय बिताकर उनकी नोक झोंक भरी बातें सुनकर एहसास हो रहा है कि इतने सालों से मैं क्या खो रहा था। एक तरह से कहा जा सकता है कि लॉक डाउन के कारण सामाजिक दूरी व पारिवारिक निकटता में बढोतरी हुई है ।

मुझे तो लगता है इस लोक डाउन के कारण कई घरों में कई ऐसी समस्याओं का निराकरण भी हुआ होगा जो बहुत दिन से लंबित थी। इसमें कोई दो राय नहीं कि यह लॉक डाउन बहुत ही प्रतिकूल कारणों से किया गया है, परंतु यह भी सच है कि जिस त्रासदी से हम गुजर रहे हैं उसे पराजित करने का यही एक मात्र उपाय है । इस लाक डाउन से अनुभव हो रहा है कि इस जगत में हर घटना किसी न किसी रूप में किसी ना किसी के लिए लाभकारी होती है भले हम अपने छोटे से चश्मे से इसे कोसते रहे। शायद प्रकृति का संतुलन बनाने का अपना ही कोई तरीका है I अंत में सब से आग्रह है कि अपने परिवार के साथ घर पे ही रहें और सुरक्षित रहें | यह  एक तूफ़ान है जो जल्द गुज़र जायेगा ।

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